Brahm Chintan

प्रस्तुत पुस्तक ब्रह्म चिंतन का मुख्य सार संसार में तल्लीन कैसे हों। जब हमने भगवान् की सेवा में आत्मसमर्पण कर दिया, तब फिर हमारा समय, हमारा धन, हमारी शक्ति, मन, बुद्धि - सब कुछ भगवान् का हो गया। फिर हम इनका सदुपयोग केवल भाग्वात्कैंकर्य में कर सकते हैं। समय का एक क्षण भी, शक्ति का एक कण भी, द्रव्य का एक पैसा भी हम व्यर्थ और निरर्थक कार्यो में नष्ट नहीं कर सकते। जिन कार्यो से न अपना उपकार होता हो न पराये का, अपितु परिवार या समाज का अनिष्ट ही होता हो तो ऐसे कार्यो में समय, शक्ति, समझ और धन को लगाना बड़ी भूल है। व्यर्थ गपशप में, निरर्थक वाद-विवाद में, समझ, समय, शक्ति और सम्पदा का दुरुपयोग अक्षम्य अपराध है।

कबहुँक करि कहना नर देही |
देत ईस बिनु हेतु सनेही ||

 

First Edition : 2012
Price : Rs. 270
ISBN : 978-93-81221-55-6
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