Brahm Gyan

जहाँ विश्व और ब्रह्माण्ड के प्रपंच समाप्त हो जाते हैं, बिंदु और विराट एक हो जाता है, अस्ति-नस्ति (है-नहीं है) का तर्क समाप्त हो जाता है, वही ज्ञान ब्रह्म ज्ञान है। सभी जीव-जाति, सजीव निर्जीव वस्तुएं एक ही हैं। उनमें गुण का नहीं अनुपातिक मात्रा का अंतर है। यह ज्ञान हो जाना ही तत्त्व ज्ञान है और तत्त्व ज्ञान से ब्रह्म ज्ञान होता है।वास्तविक मुक्ति यही है, जहाँ सब समान हो जाते हैं। यही तत्त्व ज्ञान शंकराचार्य, गौतम बुद्ध, ईसा मसीह और पैगम्बर मुहम्मद को हुआ।

वेद, उपनिषद्, पुराण और वेदान्त दर्शन की व्याख्याओं की चर्चा और अपने अनुभवों का अवलोकन इस पुस्तक में हुआ है।

 

»» ध्यान की विधियाँ

First Edition : 2002
Price : Rs. 250
Pages : 216