Jeev Jagat Aur Maya Brahm

संसार की अनंत श्रृंखला में प्रत्येक जीव अपने कर्म और भोगों के कारण पुनः पुनः कर्ता और भोक्त बनता है। आज के कर्म पूर्व जन्म के कर्म हैं। कर्म जीव के भाग्य में परिवर्तन लाते हैं। कर्म से एक नए क्षण को प्राप्त करते हैं। यह नया एक क्षण ही मुक्ति का कारण बन सकता है।

तत्त्व ज्ञान ही मोक्ष है। तत्त्व ज्ञान वास्तव में क्या है? तत्त्व ज्ञान से कैसे मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है? यह समझ लेना कि जीव, आजीव और निर्जीव सभी एक ही पद-पदार्थ हैं - मुक्ति या मोक्ष है। जब कोई यह जान ले कि जो सब है वही मैं हूं और जो मैं हूं वही सब है तब क्यों विश्व में आतंक और युद्ध की विभीषिका हो ? प्रस्तुत पुस्तक में उपर्युक्त बातों को सरल और विश्लेषणात्मक गवेषणा की गयी है। निश्चय ही पाठकों को तत्त्व ज्ञान से मुक्ति को समझने में सहायता मिलेगी।

 

First Edition : 2012
Price : Rs. 350
ISBN : 978-93-81221-57-0
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