Maya Aur Avidya

" विकास का तात्पर्य है प्रतिपल प्रति-कदम वृद्धि ; वृद्धि का सार है मंजिल लेकिन चलोगे नहीं तो पहुंचोगे कैसे? चल पड़ो-अचानक चल पड़ो। तुम्हारे साथ पाथेय हो या न हो। अनायास ही तुम पाथेय भगवता और मंजिल को प्राप्त हो जाओगे।"

न तो चलने का विकल्प है और न रास्ते का।

 

 

First Edition : 2012
Price : Rs. 250
ISBN : 978-93-81221-56-3
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